Question
अब ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾चकित भरमाया है।(प्रण, कुरुपति, बल, पार्थ, वंश, जगत)

Answer

स्वप्रयत्न

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संभवतः वह सोना की स्नेही और $................$ प्रकृति से परिचित हो गई थी।
$................$ तातो होय, आप सियरे है रहिए।
मगर यह कोई जरूरी नहीं कि‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾पैसा साथ लेकर आए।(ऑलिवन, हॉकी, जुझारू, शोहरत, मास्टर, घास)
पर, पेट की आग में तो सभी ज्ञान और विज्ञान $...........$ हो जाते हैं।
सम्मान‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾से पाता है।(प्रण, कुरुपति, बल, पार्थ, वंश, जगत)
मैं बहुत ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾था मैदान में भी और मैदान से बाहर भी।(ऑलिवन, हॉकी, जुझारू, शोहरत, मास्टर, घास)
$................$ टर$-ट$र करते, झिल्ली बजती झन$-$झन।
"यह तो पंडितजी ठीक कहते हैं, पंडितजी की $................$ तो देखो।"
एक दिन रामू की बहू ने रामू के लिए $................$ बनाई।
आज तक मैंने किसी का भी पैसा उल-‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾या चोरी से नहीं लिया।(पापबुद्धि, धन, निर्धनता, दोषारोपण, कपर, बुद्धिमत्ता, खोखले, देवता)