अजंता की गुफाओ में शिल्पों की तरह उसके चित्रों की भी अधिक विशेषता है | बंदरो का चित्र कितना सजीव और गतिमान है , सरोवर में जलविहार करता वह गजराज कमलदंड तोड़ तोड़ कर हथिनीओ को दे रहा है | वहां महलो में वह प्यालो के दौर चल रहे है, उधर वह रानी अपनी जीवन यात्रा समाप्त कर रही है |,उसका दम टुटा जा रहा है | खाने खिलाने , बसने बसाने , नाचने गाने, कहने सुनने , वन –नगर ,उंच नीच ,धनि- गरीब के जितने नज़ारे हो सकते है सब आदमी अजन्ता की गुफाओ की इन दीवारों पर देख सकते है |