वीरेश्वर ने करुणा दिखाकर आलसियों के लिए भोजन वस्त्रादि की व्यवस्था करवाई। परन्तु सहज, सुलभ भोजनादि आश्रय को पाकर धूर्त और जो आलसी नहीं थे, वे भी वहाँ जाकर भोजन पाने लगे, जिससे अलसशाला का व्यय आवश्यकता से अधिक बढ़ गया। वास्तव में आलसी कौन है, इसका पता लगाने के लिए ही अलसशाला में आग लगवा कर नियोगी पुरुषों ने यह जान लिया कि वास्तव में आलसी कौन है।