जहाँ किसी 'अप्रस्तुत' के माध्यम से 'प्रस्तुत' का वर्णन किया जाए, वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है। इसमें सीधे तौर पर बात न कहकर किसी अन्य के माध्यम से लक्ष्य को संबोधित किया जाता है।
उदाहरण : "नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकास इहि काल। अली कली ही सौं बँध्यो, आगे कौन हवाल।" (यहाँ कवि बिहारी ने भौरे और कली के माध्यम से राजा जयसिंह को उनके कर्तव्य की याद दिलाई है।)