Question
अपने ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ बिचारि कै देखो और दूसरो नाहीं।

Answer

स्वप्रयत्न

Need a full question paper?

Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.

Start Generating Free

Similar questions

अब समय आ गया है लोग ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ बोलें।
कालू, तुम  ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ 'वाले दोनों गीत मोना को सिखा देना।(फायर, खंडहर, सूर्यनारायण, प्रभातफेरी, पच्छिम, गाड़ीवान)
कहैं कबीर ज्ञान जेहि ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ बिरलै ताहि लखाहीं।
बहाव इतना तेज कि ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ भी बह जाए।
स्थान में संघर्ष हो, तो ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ भी जीतती है।
सूरज ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ की ओर झुक गया।(फायर, खंडहर, सूर्यनारायण, प्रभातफेरी, पच्छिम, गाड़ीवान)
उसके ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ भी कम नहीं थे।
रात्रि का विश्राम ही ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ बूटी है।(कंठहार, मदांधता, शिल्पियों, महाविपत्ति, संहारक, उजाला, संजीवनी)
पुल के पास एक ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ तन्मय होकर गीत गा रहा था।(फायर, खंडहर, सूर्यनारायण, प्रभातफेरी, पच्छिम, गाड़ीवान)
‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ से कमर कसी है, हाथ लिये पिचकारी।