Question
अर्धसूत्री विभाजन का क्या महत्त्व है?

Answer

अर्धसूत्री विभाजन का महत्त्व (Significance of Meiosis) -
(i) युग्मकों में गुणसूत्र संख्या कायिक कोशिका से आधी रह जाती है। यह अवस्था लैंगिक जनन के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दो युग्मकों का संलयन होता है। यदि गुणसूत्र संख्या आधी नहीं होगी तो कायिक कोशिका में संलयन के पश्चात् हर बार दुगुने गुणसूत्र हो जाते हैं। अतः युग्मनज बनने के लिए पहले अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) तथा फिर संलयन (fusion) दोनों क्रियाएँ आवश्यक हैं।
(ii) इसमें गुणसूत्रों के टुकड़ों के आदान - प्रदान से नई - नई किस्में बनती हैं।
(iii) इस क्रिया से आनुवंशिक विविधिताएँ मिलती हैं।
(iv) अर्धसूत्री विभाजन के दूसरे भाग में सेन्ट्रोमियर का विभाजन होकर क्रोमेटिड पृथक् होते हैं तथा अन्त में बनने वाली चारों कोशिकाओं में पृथक् - पृथक् प्रकार के गुणसूत्र मिलते हैं।
(v) पुत्री कोशिकाओं में गुणसूत्र संख्या मातृ कोशिका की आधी होती है।

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