Question
बाबा भारती घोड़े की किस प्रकार सेवा करते थे?

Answer

बाबा भारती को भगवद्-भजने के बाद जो समय बचता, वह घोड़े की सेवा में अर्पण हो जाता। वे रोजाना अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और उसे देख-देखकर प्रसन्न होते थे। वे ऐसी लगन, ऐसे प्यार और स्नेह से अपने सुलतान घोड़े की देखभाल करते थे कि मानो वह उनका अतीव प्रियजन हो। उन्हें रुपया, माल असबाब, जमीन तथा नागरिक सुखमय जीवन से भी घृणा थी। वे गाँव के बाहर एक छोटे मंदिर में रहते थे। वे सुलतान से अतिशय प्रेम करते थे और उसके दाना-पानी का पूरा ध्यान रखते थे।

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इसलिए मैंने इरादा किया है कि कभी-कभी तुम्हें इस दुनिया की और उन छोटे-बड़े देशों की जो इस दुनिया में हैं, छोटी-छोटी कथाएँ लिखा करूँ। तुमने हिंदुस्तान और इंग्लैड का कुछ हाल इतिहास में पढ़ा है लेकिन इंग्लैंड केवल एक छोटा-सा टापू है और हिंदुस्तान, जो एक बहुत बड़ा देश है, फिर भी दुनिया का एक छोटा-सा हिस्सा है। अगर तुम्हें इस दुनिया का कुछ हाल जानने का शौक है, तो तुम्हें सब देशों का और उन सब जातियों का जो इसमें बसी हुई हैं, ध्यान रखना पड़ेगा, केवल उस एक छोटे-से देश का नहीं जिसमें तुम पैदा हुई हो।
QUESTION:
Q.1. पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
Q.2. यह बात कौन, किसको लिख रहा है?
इकट्ठा किए हुए टिकटों का अलग-अलग तरह से वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसे-देश के आधार पर। ऐसे और आधार सोचकर लिखो।
वर्तमान में भी रहीमदास के दोहों की सार्थकता ज्यों की त्यों है- कैसे?
हमें अपनी जिह्वा से सोच-समझकर क्यों बोलना चाहिए?
गर्मी के दिनों में कच्ची सड़क की तपती धूल में नंगे पाँव चलने पर पाँव जलते हैं। ऐसी स्थिति में पेड़ की छाया में खड़ा होने और पाँव धो लेने पर बड़ी ग्रहत मिलती है। ठीक वैसे ही जैसे प्यास लगने पर पानी मिल जाय और भूख लगने पर भोजन। तुम्हें भी किसी वस्तु की आवश्यकता हुई होगी और वह कुछ समय बाद पूरी हो गई होगी। तुम सोचकर लिखो कि आवश्यकता पूरी होने के पहले तक तुम्हारे मन की दशा कैसी थी?
मगर हाल जानने का असली तरीका यह नहीं है कि हम केवल दूसरों की लिखी हुई किताबें पढ़ लें, बल्कि खुद संसार-रूपी पुस्तक को पढ़ें। मुझे आशा है कि पत्थरों और पहाड़ों को पढ़कर तुम थोड़े ही दिनों में उनका हाल जानना सीख जाओगी। सोचो, कितनी मज़े की बात है। एक छोटा-सा रोड़ा जिसे तुम सड़क पर या पहाड़ के नीचे पड़ा हुआ देखती हो, शायद संसार की पुस्तक का छोटा-सा पृष्ठ हो, शायद उससे तुम्हें कोई नई बात मालूम हो जाए। शर्त यही है कि तुम्हें उसे पढ़ना आता हो।
QUESTION:
Q.1. संसार को पुस्तक क्यों कहा गया है?
Q.2. संसार का हाल जानने का असली तरीका कौन-सा है?
इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम, नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम, अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम, भारत के इतिहास-गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसीवाली रानी थी। लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
QUESTION:
Q.1. किस स्वतंत्रता-महायज्ञ की बात कवयित्री ने इस पद्यांश में की है?
(A) 1857 की क्रांति (B) स्वदेशी आंदोलन (C) असहयोग आंदोलन (D) भारत छोड़ो आंदोलन
Q.2. भारत के इतिहास-गगन में किनके नाम अमर होने की बात कही गई है?
(A) अजीमुल्लाह एवं नाना धुंधूपंत (B) रानी सखियाँ-काना एवं मंदरा (C) रानी का घोड़ा (D) इनमें कोई नहीं
Q.3. इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम-इस पंक्ति का क्या अर्थ है ?
Q.4. देश के लिए कुर्बान होने वाले विख्यात वीर सैनिक कौन थे?
कविता में कवि ने किन दो महाकाव्यों के किन-किन पात्रों का उल्लेख किया है और भारतीय संस्कृति में उनका क्या महत्व है?
भारत को पुण्यभूमि और स्वर्णभूमि क्यों कहा गया है ?
धरती को ‘बूढ़ी’ कहने का क्या तात्पर्य है?