बालक का बचना उसके शारीरिक जीवन से नहीं, बल्कि उसके 'बचपन' के बचने से है। रटंत विद्या और भारी शिक्षा के बोझ के बावजूद, जब इनाम के रूप में उससे कुछ माँगने को कहा गया, तो उसने अपनी स्वाभाविक बाल-इच्छा के कारण 'लड्डू' माँगा। लड्डू माँगना इस बात का प्रतीक था कि उसके भीतर का बच्चा अभी मरा नहीं है और वह कृत्रिम ज्ञान के नीचे पूरी तरह नहीं दबा है।