बड़ा होकर मैं अपंगों का डॉक्टर बनना चाहता हूँ।मैं देखता हूँ कि तरह$-$तरह की दुर्घटनाओं के कारण देश में अपंगों की संख्या बढ़ती जा रही है। लाचार अपंग अपना ठीक से इलाज भी नहीं करा सकते। बहुत$-$से अपंगों को भीख माँगकर पेट भरना पड़ता है। समाज में अपंगों को कोई सम्मान नहीं देता। वे बेचारे आँसुओं के पूंट पीकर जीते हैं। मेरा प्रयत्न होगा कि अपंगों की अपंगता मिट जाए और वे भी अपने बल पर जी सकें।
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