पहले के जमाने में समाज में बेटे को महत्त्व दिया जाता था। बेटे को ज्यादा पढ़ाते थे। बेटी को पराया धन माना जाता था ।
आज जमाना बदल गया है। समाज में बेटे-बेटी को समान गिना जाता हैं। बेटा से बेटी कुछ कम नहीं। बेटी महान है, क्योंकि बेटी दो परिवारों को आगे बढानेवाली हैं। बेटी महान हैं। बेटी पढ़ लिखकर अपने पिता के परिवार का नाम रोशन करती है, जैसे सुनिता विलियम्स। बेटी ससुराल जाकर अपने ससुराल को भी अपनी सुझ बुझ से आगे बढ़ाती है। हमें बेटी या बेटे में भेदभाव नहीं रखना चाहिए। बेटियों को भी बेटे की तरह पढ़ने-लिखने की सुविधा देनी चाहिए।
बेटी महान तब हो सकती है, जब हम उसको सब सुविधाएँ दें। इंदिरा गाँधी होते. जवाहरलाल नेहरू की इकलौती बेटी थी, जो बेटे से भी बढ़कर निकली। लेना वल्लभभाई पटेल की बेटी मणीबहन ने भी पिता का नाम रोशन किया था। इन उदाहरणों से सिद्ध होता है कि बेटी भी महान हो सकती है।