(अ) स्थायी संसदीय समितियों के कार्य-विभिन्न विधायी कार्यों के लिए भारत में स्थायी संसदीय समितियों का गठन किया गया है। ये समितियाँ केवल कानून बनाने में ही नहीं, वरन् सदन के दैनिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यथा-
(1) विधायी कार्य-चूंकि संसद के पास कम समय होता है, इसलिए उस पर गहन अध्ययन हेतु वह स्वयं विचार करने से पूर्व संसद की संबंधित स्थायी समिति को भेज देती है। भारत में विभिन्न विभागों से संबंधित 20 स्थायी समितियाँ हैं जो उनसे संबंधित विधेयकों पर विचार करती हैं। ये समितियाँ संसद द्वारा विधेयक पर गहन अध्ययन व विचार-विमर्श कर अपनी सिफारिशें करती हैं। इन सिफारिशों को सदन में भेज दिया जाता है। इन समितियों में सभी संसदीय दलों को प्रतिनिधित्व प्राप्त होता है। इन समितियों के सुझावों को सामान्यतः संसद स्वीकार कर लेती है।
(2) दैनिक कार्य-संसदीय समितियाँ विधायी कार्य के अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण दैनिक कार्य भी करती हैं,
जैसे-विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगों का अध्ययन, विभिन्न विभागों के द्वारा किये गए खर्चों की जाँच, भ्रष्टाचार के मामलों की पड़ताल आदि।
(ब) संयुक्त संसदीय समितियों के कार्य-स्थायी संसदीय समितियों के अतिरिक्त देश में संयुक्त संसदीय समितियों का गठन किसी विधेयक पर संयुक्त चर्चा अथवा वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के लिए किया जा सकता है।