Question
भई, सूरज ! जरा इस ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ को जगाओ।

Answer

स्वप्रयत्न

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सर सूखे __________ उड़ै, औरै सरन्ह समाहिं।(बसंत, बिधा, पंछी, नारायण, आपा)
बिहसे करुनाएन, चितइ ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ लखन तन।
कुत्ते भाषा नहीं ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ पहचानते हैं।(ऊँचे पर्वतीय, लूसी, वर्णसंकरता, स्तब्ध, दैन्य, ध्वनि)
अब समय आ गया है लोग ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ बोलें।
कहैं कबीर ज्ञान जेहि ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ बिरलै ताहि लखाहीं।
स्थान में संघर्ष हो, तो ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ भी जीतती है।
कविता में इतना दोहराव है कि वह शब्दों की ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ लगती है।
मैंने अपनी प्रयोगशाला में अपना____________ सुगम बना लिया है।
उसका मूर्छित होना था कि ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ में बिजली दौड़ गयी।(कंठहार, मदांधता, शिल्पियों, महाविपत्ति, संहारक, उजाला, संजीवनी)
गुड्डे की ________________टोपी उलटी नीचे पड़ी है।