Question
भोला गरीबक दीन-पहिया हरब भोला…

Answer

यह उद्धरण आंचलिक बोली का होने से और इकाई (पाठ) में इसका सीधा संदर्भ न मिलने से यहाँ इसका उत्तर नहीं दिया गया।

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धरती की शान,
तू भारत की संतान
तेरी मुढ़ियों में
बंद तूफान है रे
दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय॥
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ता चढि मुल्ला बाँग दै, क्या बहिरा हुआ खुदाय ॥
‘काम के पीछे बुखार भागे।’
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चंदन विष व्याप्त नहीं, लपटे रहत भुजंग।
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वैभव-विलास की चाह नहीं, अपनी कोई परवाह नहीं, बस यहीं चाहता हूँ केवल, दान की देव सरिता निर्मल, करतल से झरती रहे. सदा, निर्धन को भरती रहे. सदा।