भू-परिष्करण यंत्रों का वर्णन निम्नवत् है-
(1) देशी हल- देशी हल भारत में प्राचीनकाल से ही भू-परिष्करण क्रिया में सहायक है। इसका आकार विभिन्न प्रान्तों में पाये जाने वाले बैलों की कद, काठी पर निर्भर करता है। यह जुताई, निराई, गुड़ाई जैसे भू-परिष्करण क्रियाओं में सहायक है। इस हल से औसतन 8 घण्टे में 0.3 हे. खेत जोता जा सकता है। देशी हल से जुताई कराने से दो कूँडों के बीच बिना जुता स्थान रह जाता है क्योंकि इसके कूडों का आकार V जैसा होता है।
2. मिट्टी पलटने वाले हल- ये हल मिट्टी को काटकर नीचे से ऊपर तथा ऊपर से नीचे कर देते हैं। इनको ग्रीष्म ऋतु की जुताई तथा खेतों की मेढ़ बनाने में, गन्ने की नाली बनाने इत्यादि भू-परिष्करण क्रियाओं के लिए प्रयुक्त किया जाता है। आठ घण्टे में औसतन 0.4 हे. भूमि को जोता जा सकता है। इस हल के कूँडों का आकार L के समान होता है। मिट्टी पलटने वाले हल कई प्रकार के होते है, जैसे-मोल्ड बोर्ड हल, डिस्क हल, पंजाब हल आदि।
3. कल्टीवेटर- बीज बोने के बाद की जाने वाली भू-परिष्करण क्रियाओं को कल्टीवेयर द्वारा किया जाता है। इसमें मृदा को भुरभुरी बनाना, पपड़ी को तोड़ना, खरपतवारों को निकालना, पौधों को अधिक होने पर उनकी संख्या को कम करना, खाद-उर्वरकों को मिलाना तथा जमीन के अन्दर वाली फसलों की बढ़वार के लिए मृदा की उचित भौतिक दशा बनाए रखना आदि भू-परिष्करण क्रियाएँ पूर्ण की जाती हैं।
कल्टीवेटर कई प्रकार के होते हैं, जैसे-डकफुट टाइन, डिस्क कल्टीवेटर आदि।
4. हैरो- जुताई के बार मृदा को बीज बोने योग्य बनाने के लिए उचित योग्यता की आवश्यकता होती है। इसके लिए जुती हुई जमीन को खुर्द करना, ढेलों को तोड़ना, पौधों के अवशेषों को मिट्टी में दबाना या हटाना तथा खरपतवारों को नष्ट करना, मृदा को समतल और सघन बनाना आदि भू-परिष्करण क्रियाएँ हैरो द्वारा की जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में मृदा की दशा एवं जलवायु के आधार पर विभिन्न प्रकार के हैरो प्रयुक्त किये जाते हैं। जैसे-डिस्क हैरो, स्पाइकटूथ हैरो, स्प्रिंग हैरो, पलवेराइजर एवं रोलर इत्यादि।