मुख्य रूप से भूकम्प पृथ्वी की प्लेटों की गतियों के कारण उत्पन्न होते हैं। पृथ्वी की ऊपरी परत जिसे भूपर्पटी कहते हैं, यह कई टुकड़ों में विभाजित है। प्रत्येक टुकड़े को प्लेट कहते हैं। ये प्लेट निरन्तर गति करती रहती हैं। जब ये एक - दूसरे से रगड़ खाती हैं अथवा टकराती हैं तो एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे चली जाती है। इसके कारण भूपर्पटी में विक्षोभ उत्पन्न होता है। यही विक्षोभ पृथ्वी की सतह पर भूकम्प के रूप में दिखाई देता है। जहाँ प्लेटों की सीमाएँ दुर्बल क्षेत्र होती हैं, वहाँ भूकम्प आने की सम्भावना अधिक होती है। इन दुर्बल क्षेत्रों को भूकम्पी क्षेत्र अथवा भ्रंश क्षेत्र भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त ज्वालामुखी के फटने, किसी उल्का पिण्ड के पृथ्वी से टकराने अथवा किसी नाभिकीय विस्फोट के कारण भी भूकम्प आ सकते हैं।