वास्तव में, बीज के निर्माण के अन्तर्गत भ्रूण विकास, भ्रूणपोष विकास व बीजाण्ड में होने वाले परिवर्तन आते हैं। इन सबके कारण बीजाण्ड, बीज में परिवर्तित हो जाता है। दोनों अध्यावरण बीजावरण बना देते हैं जिसमें बाहर वाला बीज चोल व अन्दर वाला टेगमेन कहलाता है। बीजाण्डवृन्त बीज का वृन्त बनाता है। नाभिका, बीजाण्डद्वार, रैफी और निभागमें कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता है। विकास के समय बीजाण्डकाय पूर्णरूप से प्रयोग में आ जाता है किन्तु कुछ बीजों में भ्रूणपोष शेष रहकर एक पतली झिल्ली के रूप में रह जाता है जिसे परिभ्रूणपोष कहते हैं।