बिन्दु-उत्परिवर्तन-जीन उत्परिवर्तन जिसमें एकल नाइट्रोजन क्षारक का प्रतिस्थापन, विलोपन या निवेशन होता ह, उसे बिन्दु उत्परिवर्तन कहते हैं। जीन उत्परिवर्तन DNA द्विगुणन के समय होते हैं, जब इससे नई न्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं का निर्माण होता है अर्थात् DNA रज्जुक संश्लेषित होते हैं।
उदाहरण के लिये, मनुष्य में दात्र कोशिका अरक्तता रोग DNA के एक नाइट्रोजन क्षार के परिवर्तन के कारण हो जाता है।