शासन और समाज की सुख-सुविधा के लिए सरकार तरह-तरह के कानून बनाती है। लेकिन भारतवासियों की दृष्टि में धर्म कानून से बड़ा है। धर्म के कारण ही अब भी सेवा, सच्चाई, ईमानदारी और आध्यात्मिकता आदि बने हुए हैं। धर्म के भय से मनुष्य झूठ और चोरी को गलत समझता है। धर्मबुद्धि के कारण ही लोग दूसरों को पीड़ा पहुंचाना पाप मानते हैं। धर्मबुद्धि ही लोभ, मोह, काम, क्रोध आदि विकारों पर संयम रख सकती है और निकृष्ट आचरण करने से रोकती है है। इसीलिए धर्म को भारतवर्ष में श्रेष्ठ माना गया है।