Question
दिलीप के मन में क्षोभ का अंत न रहा $?$

Answer

जिसे मनुष्य सर्वापेक्षा अपना समज भरोसा करता है, जब उसी से अपमान और तिरस्कार प्राप्त हो, तब मन वितृष्णा से भर जाता है | एकदम मर जाने की इच्छा होने लगती है | इसे शब्दों में बता सकना संभव नहीं|
दिलीप ने हेमा को पूर्ण स्वतंत्रता दी थी | वह उसका अधिक आदर रहता था | उसके प्रति बहुत अनुरक्त था | इस पर भी जब वह हेमा को संतुष्ट न कर सका और एक दिन वह हेमा की सखी के साथ सिनेमा देख आने के कारण हेमा दिनभर रूठी रहकर दुसरे ही दिन माँ के घर चली गई | तब दिलीप के मन में क्षोभ का अंत न रहा |

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