Question
दिन छिपने पर कवि किसका इंतजार करता है ? क्यों ?

Answer

हररोज दिन छिपने पर सुबह की आशा में कवि इन्तजार करता है। सूर्योदय के साथ फिर वही क्रम और फिर से तुम्हारा इन्तजार, यह जानते हुए कि सुबह की रोशनी की तरह सूखे बरगद के पेड़ को हरियाला बनाने के लिए वह कभी नहीं आएगा।

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