ये ऐसे दल हैं जो यथास्थिति को बनाए रखना चाहते हैं। वे क्रान्ति या उग्र परिवर्तन का विरोध करते हैं, ताकि समाज के उच्च या विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों की स्थिति सुरक्षित रहे। प्रतिक्रियावादी होने के नाते वे किसी धर्म, जाति या नस्ल की उत्तमता का गुणगान करते हैं तथा लोगों की साम्प्रदायिक भावनाओं को उकसाकर अपनी लोकप्रियता का परिचय देते हैं। स्पष्ट है कि ऐसे दल पूँजीपतियों, भूमिपतियों तथा धर्म गुरुओं के हितों की रक्षा करते हैं जिससे समाज के कमजोर या पिछड़े वर्गों (जैसे किसानों, मजदूरों, दलितों, अल्पसंख्यकों आदि) के हितों को ठेस पहुँचती है। केन्द्र पर भारतीय जनता पार्टी तथा राज्यों के स्तर पर पंजाब में अकाली दल, महाराष्ट्र में शिव सेना, केरल में मुस्लिम लीग आदि इसी के उदाहरण कहे जा सकते हैं।