दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) :
यह पक्षियों तथा स्तनियों में पाया जाता है। इन प्राणियों में शुद्ध तथा अशुद्ध रक्त पृथक् रहता है। हृदय के दाएँ भाग को सिस्टेमिक हृदय (systemic heart) तथा बाएँ भाग को पल्मोनरी हृदय (pulmonary heart) कहते हैं। इनमें शुद्ध तथा अशुद्ध रक्त पृथक् रहने के कारण इसे द्वि चक्रीय परिसंचरण या दोहरा परिसंचरण कहते हैं। दोहरे परिसंचरण का महत्त्व दोहरे परिसंचरण में हृदय में दो अलिन्द तथा दो निलय होते हैं। इस कारण हृदय में शुद्ध रुधिर तथा अशुद्ध रुधिर अलग-अलग रहते हैं। हृदय के दाएँ भाग में सारे शरीर से अशुद्ध रुधिर आता है तथा यह रुधिर पल्मोनरी चाप द्वारा फेफड़ों में शुद्ध होने के लिए चला जाता है। हृदय के बाएँ भाग में पल्मोनरी शिराओं द्वारा शुद्ध रुधिर आता है तथा यह कैरोटिको सिस्टेमिक चाप द्वारा सारे शरीर में प्रवाहित हो जाता है।इस प्रकार दोहरे परिसंचरण में कहीं भी शुद्ध व अशुद्ध रुधिर का मिश्रण न होने के कारण परिसंचरण अधिक प्रभावशाली (efficient) रहता है। इसके अतिरिक्त दो अलग-अलग बन्द कक्ष होने के कारण रुधिर प्रवाह के लिए अधिक दाब उत्पन्न होता है।
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