Question
दशाश्वमेध घाट पर पहुँचकर लेखक ने क्या देखा ?

Answer

कवि को अनुभव हुआ कि गंगा नदी को स्पर्श करने वाला घाट का आखिरी पत्थर कुछ नरम हो गया है। पाषाण हृदय व्यक्तियों के हृदय में भी परिवर्तन हो गया है। घाट पर बैठे बन्दरों की आँखें नम दिखाई देती हैं। भिखारियों के कटोरे भीख से भर जाते हैं। दीन-हीनों में भी उमंग व्याप्त हो जाती है।

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