Question
द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक है-

Answer

(द) कूलॉम - मीटर

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10 सेमी त्रिज्या व 100 फेरे वाली कुण्डली में 1 एम्पीयर की धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण होगा-
एक कार्नो इंजन $100^{\circ} C$ तथा $-23^{\circ} C$ पर कार्य करता है। इसकी दक्षता होगी :
यदि प्रत्यावर्ती परिपथ में वोल्टेज का शिखर मान $E_0$ है तो इसका वर्ग माघ्य मूल मान होगा
एक शुद्ध अर्द्धचालक का परम शून्य ताप पर व्यवहार है-
विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता की विमा है
फोटॉन का संवेग होता है-
हाइगेंस के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त में पीछे की ओर लौटने वाली तरंग की अनुपस्थिति साबित की-
दो आवेशों के मध्य बल F है। यदि उनके मध्य दूरी को तीन गुणाकरने पर इन आवेशों के मध्य विधुत बल होगा-
दो समरूप कुण्डलियों में समान विद्युत धारा बहती है। इनके केन्द्र उभयनिष्ठ तथा तल परस्पर लम्बवत् हैं। एक कुण्डली के कारण इसके केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र B है तो उभयनिष्ठ केन्द्र पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र होगा -
n-प्रकार के अर्द्धचालकों में पाये जाते हैं-