ग्रामीण और नगरीय समुदाय में अन्तर
ग्रामीण और नगरीय समुदाय में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं
(1) ग्रामीण समुदायों में, सामुदायिक जीवन पर प्रकृति की प्रधानता रहती है। ग्रामीण समुदाय के सदस्य त्यौहार मनाने, मेले, विवाह तथा अन्य अवसरों के आयोजनों पर, फसल की कटाई-बुवाई के समय एक-दूसरे की सहायता देने के लिए एक साथ आते हैं।
दूसरी तरफ नगरीय समुदायों में प्राकृतिक पर्यावरण के ऊपर मानव निर्मित पर्यावरण की प्रधानता रहती है। अतः वे मानव निर्मित पर्यावरण में अपने बनाए नियमों के तहत एक-दूसरे के नजदीक आते हैं।
(2) ग्रामीण समुदाय प्रायः अलिखित नियमों से संचालित होते हैं, जबकि नगरीय समुदाय लिखित नियमों से संचालित होते हैं।
(3) ग्रामीण समुदाय प्राकृतिक संपदा और पानी, चरागाहों तथा वन-उत्पाद जैसे संसाधनों का साझा उपयोग करने पर सहमत हैं तथा वे इन संसाधनों का उपयोग एक तरह से अलिखित नियमों के आधार पर करते हैं।
दूसरी तरफ नगरीय समुदाय पानी, बिजली, सफाई आदि के उपयोग के लिए लिखित नियमों तथा अन्य समुदायों के कार्यों पर निर्भर रहते हैं।
(4) ग्रामीण समुदाय लघु आकार के होते हैं, जबकि नगरीय समुदाय बड़े आकार के होते हैं।
(5) ग्रामीण समुदायों में इसके सदस्य व्यक्तिगत तथा प्राथमिक सम्बन्धों के आधार पर संबंधित रहते हैं, जबकि नगरीय समुदायों के सदस्यों में द्वितीयक सम्बन्धों की प्रधानता होती है। इनके सदस्य प्रायः अप्रत्यक्ष रूप से ही संबंधित रहते हैं।