हार्मोन के चार महत्त्व निम्न हैं-
(1) हार्मोन वृद्धि, परिवर्धन, परिपक्वन और जनन का नियन्त्रण करते हैं।
(2) ये विभिन्न शरीर क्रियात्मक प्रक्रियाओं की दर का, उनकी लयात्मक विविधताओं का और ऊर्जा व्यय का नियमन भी करते हैं।
(3) ये तन्त्रिका-तन्त्र की क्रियाविधि पर प्रभाव डालते हैं।
(4) किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व और उसका आचरण अधिकांशतः अंतः स्त्रावी ग्रन्थियों पर ही निर्भर होता है।