✓
Answer
हमारे जीवन में त्योहारों का अधिक महत्व है | सारे साल तक एक सा काम करने से मानव उब जाता है | जीवन की इस उबन को मिटाने के लिए हमारे पूर्वजो ने त्यौहार का आयोजन किया है | संस्कृत के विद्वान् कालिदास ने लोगो को “उत्सवप्रिय जना:” अर्थात लोग उत्सव प्रिय है | ऐसा उचित ही कहा है | प्रत्येक महीने में उत्सव आते ही रहते है | प्रत्येक महीने के निश्चित दिन लोग अपने ईस्टदेव के दर्शन हेतु जाते है | इस प्रकार भी वे लोग जीवन में परिवर्तन ला कर आनद का अनुभव करते है | भारतीय समाज धार्मिक है , चाहे वह किसी भी धर्म का ही क्यों नहो | हरेक धर्म के लोग अपने अपने विशिस्ट त्यौहार मनाकर अपने यंत्रवत जीवन में परिवर्तन ला कर आनंद महसूस करते है |
हमारे त्यौहार मुख्य तिन भाग में बांटे जाते है | $(1)$ धार्मिक $(2)$ सामाजिक $(3)$
रास्ट्रीय |
विविध धर्मवाले लोगो के त्यौहार इस प्रकार है : हिन्दू नूतन वर्ष ,लाभ पंचमी, देव दीवाली, गुरुनानक जयंती, मकरसंक्रांति ,महासिवरात्रि , होली , धुलेंडी ,गुडी पडवो, रामनवमी , हनुमान जयंती ,अक्षयतृतीया , गणेश चतुर्थी ,रक्षाबंधन , जन्माष्टमी , नन्दमहोत्सव , ऋषि पंचमी, नवरात्री ,दुर्गास्टमी ,दशहरा , धनतेरस , काली चौदस,दीवाली, पर्युषण , महावीर जयंती, संवत्सरी, शबेबरात ,रमझान ईद , मोहरम, इदे मिलाद , नाताल , ख्रिस्ती नूतन वर्ष, गुड फ्राईडे, इस्टर सन्डे ,पतेती इत्यादि | धार्मिक त्यौहार हमें धार्मिक बनने की और दुसरे धर्मो की ओर सहिष्णु बन्ने की सिख देते है | हमारे ईस्ट देव के सद्गुणों को हमारे जीवन में उतारने चाहिए | सिर्फ देव की स्तुति ,नाम स्मरण, प्रार्थना ,यात्रा , धुप दीप दर्शन आदि करने से भगवान , खुदा या प्रभु पिता प्रसन्न नहीं होते | धर्म का अर्थ है : “ध्रु धारयति इति धर्म” | अर्थात जो अपने धर्म का अपने कर्तव्य का ,अपने फर्ज का पालन करता है वही सच्चा धार्मिक है | और अपने ईस्टदेव का प्यारा होता है | सारे धर्मो के मूल सिध्हांत समान ही है | सत्य , अहिंसा ,प्रमाणिकता, जनसेवा, मानवता , पवित्रता ,कर्तव्यनिष्ठा इत्यादि गुणों का पालन करना चाहिए | ऐसा करने पर हम सच्चे धार्मिक बनेंगे | ऐसा करने में हमें जो आनंद ,बल और प्रसन्नता मिलेगी वह सनातन होगी |
उत्तरायण ,होली , धुलेटी,रक्षाबंधन ,दशहरा ,आदि त्योहारों को सारा समाज मानता है | अत : ये सामाजिक त्यौहार है | इन त्योहारों से हमें सिख मिलती है की सारे समाज की प्रजा के बिच बंधूता और एकता की स्थापना करना चाहिए | प्रजासत्ताक दिन, डॉ. आम्बेडकर जयंती, $1$ मई ,स्वातंत्रय दिन, गांधी जयंती, नेहरु जयन्ती, सरदार जयंती, इत्यादि हमारे रास्ट्रीय त्यौहार है | इन्हें मनाने से काम नहीं चलेगा | रास्ट्रीयता रास्ट्रीय कल्याण , और प्रजातंत्र मजबूत हो, ऐसे कार्य हमें करने चाहिए | महापुरुषों के गुणों को अपने जीवन में उतार कर उनके अधूरे कार्य पुरे करने चाहिए | उनके किये हुए कार्य बर्बाद हो जाए ऐसा कुछ भी हमें नहीं करना चाहिए |
त्योहारों त्योहारों से मानव जीवन में परिवर्तन आता है | थकान ,उब , हताशा ,निराशा आदी के स्थान पर ताकत ,स्फ्रुती ,प्रसन्नता ,प्रेरणा ,और प्रोत्साहन मिलता है | इनसे हम अपने नए कार्य के लिए नै शक्ति प्राप्त करते है | जीवन की ओर श्रद्धा, दिलचस्पी और अभिलाषाए बढती है | इसके लिए हमें व्यसन करने की औषधि लेने की या अन्य कोई कारक चीज का सहारा नहीं लेना पड़ता | अत: जीवन तारो तजा बनकर प्रफुल्लता से भर आता है | हमारे त्यौहार आनन्द और मनोरंजन के प्रमुख साधन है | त्योहारों से लोगो को ताजगी, स्फ्रुती ,तथा प्रेरणा मिलती है | धार्मिक त्योहारों से तनमन की कालिमा धुल जाती है | त्योहारों जातीयता और प्रांतीयता की दीवारों को ढहा देते है | वे हमारे दिलो में सहयोग और भाईचारा उत्पन्न करते है | हमारे त्योहारों हमारी संस्कृति का धयोतक है | प्रत्येक त्यौहार के सन्देश को हमें अपने जीवन में उतारना चाहिए |
Need a full question paper?
Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.
Start Generating Free