हरी खाद - दलहनी अथवा अदलहनी फसलों को हरी अवस्था में मृदा में जीवांश पदार्थ एवं पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से खेत में जुताई कर दबाने की प्रक्रिया को हरी खाद कहते हैं।
हरी खाद की फसल के आवश्यक गुण -
1. फसल में पत्तियों व शाखाओं की संख्या अधिक हो, जिससे प्रति हेक्टेयर अधिक मात्रा में कार्बनिक पदार्थ मिलाया जा सके।
2. फसल के वानस्पतिक भाग मुलायम हों, ताकि आसानी से सड़ सकें।
3. फसल फलीदार (दलहनी) होनी चाहिए, जिससे उसके पौधों की जड़ों में ग्रन्थियाँ होने के कारण राइजोबियम द्वारा वायुमण्डल से नाइट्रोजन का मृदा में स्थिरीकरण हो सके।
4. फसल गहरी जड़ प्रणाली की हो, जिससे मिट्टी भुरभुरी बन सके और पोषक तत्व ग्रहण कर पौधे में संचित कर सके।