Question
जानकारी लिखिए।
शिक्षामय विश्व:

Answer

‘शिक्षा’ शब्द संस्कृत भाषा के ‘शिक्ष्’ धातु से बना है जिसका अर्थ है – सिखना। मनुष्य जन्म से मृत्यु पर्यंत कुछन-कुछ सीखता रहता है। यह प्रक्रिया विश्वव्यापी है। दुनिया में कहीं भी जाएँ शिक्षा का महत्त्व सर्वोपरि है। कहा जाता है कि शिक्षा ही ऐसी वस्तु है; जिसे न तो चोर चुरा सकता है, न ही यह किसी को बाँटी जा सकती है, न ही राजा द्वारा छीनी जा सकती है और न ही भार लगने वाली है। इसे जितना खर्च किया जाए, उतनी ही बढ़ती है। इसके द्वारा दुनिया में प्रत्येक स्थान पर सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। कहा गया है “स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान सर्वत्र पूज्यते।”

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शब्दों का बहुवचन लिखिए।
1. बिल्ली
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विस्मयादिबोधक अव्यय से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
1. ……………………. सिर में बहुत दर्द हो रहा है। (उफ़!, काश!)
2. ……………………….. मैं भी अच्छा गा सकता। (बाप रे!, काश!)
वाक्यों के अर्थ के आधार पर उनके भेद का नाम लिखिए। :
1. बच्चे हँसते-हँसते खेल रहे थे।
2. माला घर नहीं जाएगी।
शब्दों का बाक्य में प्रयोग कीजिए।
1. नीलाम
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शब्दों को सही स्थान पर रखकर अर्थपूर्ण शब्द बनाइए।
1. याटिख
2. रककससि
शब्दों का बाक्य में प्रयोग कीजिए।
1. गंध
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कारण लिखो:
शहर परेशान हो उठा है।
युग्म शब्द लिखिए।
1. धीरे
2. रचा
किसने, किससे कहा?
1. “मेरे यहाँ की दिन-ब-दिन बढ़ती भीड़ से मैं परेशान हो उठा हूँ।”
2. “अरे देहात भाई! कितने भाग्यशाली हो कि तुम प्रदुषणमुक्त वातावरण में रहते हो।”