डैनिस चिकित्सक, क्रिस्चियन ग्राम (Christian Gram, 1884) ने जीवाणुओं की अभिरंजन क्रिया का आविष्कार किया तथा इसे ग्राम अभिरंजन (Gram stain) कहा। ग्राम अभिरंजन के आधार पर सम्पूर्ण जीवाणुओं को दो श्रेणियों ग्राम पॉजिटिव तथा ग्राम निगेटिव में विभक्त कर दिया गया। अभिरंजन की विधि में क्रिस्टल वायलेट (crystal violet) का ईथाइल एक्लोहॉल (ethyl alcohol) में घोल बनाया जाता है। स्लाइड पर जीवाणुओं को इस घोल से अभिरंजित करने के पश्चात् आयोडीन और पोटेशियम आयोडाइड युक्त जल में पुनः अभिरंजित करते हैं। इससे जीवाणु बैंगनी रंग के हो जाते हैं, फिर 90% इथायल एल्कोहॉल से धो देते हैं । यदि धोने के पश्चात् भी बैंगनी रंग वैसा का वैसा ही रहे तो जीवाणु ग्राम पॉजिटिव (Gram positive) होते हैं किन्तु यदि बैंगनी रंग न रहे तो ये ग्राम निगेटिव (Gram negative) जीवाणु होते हैं।