Question
जो ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ से बेखबर सपनों में खोया पड़ा है।

Answer

स्वप्रयत्न

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जब सारे बढ़ई हार गए तो एक ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ ने इनाम जीतने का निश्चय किया।
अपने ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ तैयारी कर रहे हैं।(मोटेराम, खड़खड़ाकर, वृक्षावलि, शिखांत, ठूंठ, भावुकता)
तू इसी पर आज अपने चित्त का __________________कर ले।
मोंहि ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ पदुम पखारन कहहूँ।
अजब रंग हूं की ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ , करके जोर चलावे।
आँख भर-भर उठी, ______________और कैसा होता होगा।
‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ होय तो तुरतै मिलिहौं, पलभर की तलास में।
‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ से भी ज्यादा मीठी वह होती।
अजब अलौकिक रच्यो, ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ , नटवर नंद दुलारे।
धर्मपद, इस मूर्ति का ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ मैंने अंकित किया है।(कंठहार, मदांधता, शिल्पियों, महाविपत्ति, संहारक, उजाला, संजीवनी)