कैंसर रोग - वयस्क जन्तुओं के शरीर के किसी भी अंग में, त्वचा से लेकर अस्थि तक, यदि वृद्धि असीमित हो तो उसे कैंसर कहते हैं। यह शरीर में धीरे-धीरे एक गाँठ का रूप धारण कर लेता है, जिसे ट्यूमर कहते हैं। यह ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं-
(i) सुदम ट्यूमर, (ii) दुर्दम ट्यूमर।
(i) सुदम ट्यूमर - यह धीरे-धीरे बढ़ता है किन्तु काफी बड़ा भी हो सकता है। यह जहाँ उत्पन्न होता है उसी स्थान पर रहता है, इधर-उधर फैलता नहीं है। इन ट्यूमरों से कैंसर रोग नहीं होता।
(ii) दुर्दम ट्यूमर - यह आरम्भ में एक गाँठ के समान होता है किन्तु थोड़े दिन पश्चात् बहुत शीघ्रता से बढ़ता है। इसमें वृद्धि असीमित होती है। दूसरे गाँठ ठोस और गोभी के फूल के आकार के उभार इसमें होते हैं। अन्त में यह शरीर में फैलना शुरू हो जाता है। अन्तिम अवस्था तब आती है जब इनकी कोशिकाएँ टूटकर रुधिर कोशिकाओं में पहुँचकर समस्त शरीर में फैल जाती हैं। रुधिर तथा लसिका से होकर यह दूसरे अंगों में पहुँचकर वहाँ भी गाँठं उत्पन्न कर देता है। इन्हें द्वितीयक दुर्दम कहते हैं। यदि हम इनकी काट का अध्ययन करेंगे तो हमें ज्ञात होगा कि इनकी कोशिकाओं की आकृति में परिवर्तन हो जाता है, केन्द्रक बड़ा तथा तर्कु आकार का हो जाता है, साइटोप्लाज्म अपेक्षाकृत बहुत कम होता है तथा अनेक कोशिकाएँ फट भी जाती हैं। द्वितीयक दुर्दम अवस्था मेटास्टैसिस भी कहलाती है। इस अवस्था में पहुँचने के बाद मनुष्य की मृत्यु निश्चित है। इस रोग का कोई इलाज नहीं है।
यह रोग प्रायः 35 ये 40 वर्ष तक के मनुष्यों में होता है और प्रायः 50 वर्ष तक की आयु में मृत्यु हो जाती है। शिशुओं, बाल्यावस्था, किशोरावस्था तथा तरुणों में यह कम होता है।
कैंसर के प्रकार - कैंसर निम्न प्रकार का होता है-
(i) सार्कोमा - इस प्रकार की दुर्दम वृद्धि भ्रूणीय मीसोडर्म से होती है, जैसे- अस्थि, पेशी, लिम्फ ग्रन्थि तथा संयोजी ऊतक का कैंसर ।
(ii) कार्सिनोमा - त्वचा या एपीथीलियम ऊतक की दुर्दम वृद्धि को कार्सिनोम कहा जाता है जैसे-त्वचा, फेफड़े, स्तन, आमाशय तथा अग्न्याशय का कैंसर ।
(iii) ल्यूकीमिया - यह रुधिर का कैंसर है जिसमें अस्थि मज्जा में कोशिकाओं के अनियन्त्रित प्रचुरोद्भवन के कारण रुधिर में ल्यूकोसाहट की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होती है।
इसके अतिरिक्त कभी-कभी छोटे बच्चों व शिशुओं में नेत्र, वृक्क तथा प्रमस्तिष्क में अति दुर्दम ट्यूमर देखे गये हैं।