Question
कहँ कंचन, के ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ धाम सुहावत। (अब/तब)

Answer

अब। 

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क्षीण चाँदनी में वृक्षों की छाया के नीचे वह बस बड़ी ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ लग रही थी। (दयनीय/सुन्दर)
पक्षियों की पाँखों पर ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ है। (तिरता/फिरता)
मुझे भी पुरानी और ऐतिहासिक चीजों के ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ करने का शौक है। (संग्रह/एकत्र)
यह दृश्य बड़ा ही ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ था। (सुहावना/शानदार)
मैं अपने दूसरे भाइयों के  ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ चट्टान में घुस गई। (आगे-आगे/पीछे-पीछे)
उसकी छाती पर कितने ही जख्मों के ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ थे। (निशान/चिह्न)
उसके ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ पंखों में इतनी शक्ति नहीं थी कि उसके शरीर का बोझ संभाल सके। (घायल/टूटे)
पूरी बस सविनय आन्दोलन के दौर से ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ रही थी। (गुजर/घूम)
धोती फटी-सी ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ दुपटी। (लटी/मोटी)
उन्होंने आपस में मिलकर अपना  ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ अस्तित्व गँवा दिया। (अप्रत्यक्ष/प्रत्यक्ष)