2. सरकारी प्रयास - देश में स्वच्छता की कमी को देखकर प्रधानमन्त्री मोदीजी ने 2 अक्टूबर, 2014 को गाँधी जयन्ती के अवसर पर 'स्वच्छता अभियान' प्रारम्भ किया। इसी के अन्तर्गत 'ग्रामीण स्वच्छता मिशन' के माध्यम से गाँवों को खुला शौचमुक्त करने का नारा दिया गया। केन्द्र सरकार ने गाँवों के बी.पी.एल., लक्षित, लघु सीमान्त किसान एवं भूमिहीन श्रमिक आदि को घर में शौचालय बनाने के लिए प्रति परिवार बारह हजार रुपये देना प्रारम्भ किया है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों एवं आँगनबाड़ी केन्द्रों में शौचालय - निर्माण हेतु आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार के इस प्रयास से अनेक गाँवों में शत - प्रतिशत शौचालय बन गये हैं। सारे भारत में अब तक ग्यारह करोड़ शौचालय बनाये जा चुके हैं तथा सन् 2022 तक गाँवों को पूरी तरह खुला - शौचमुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
3. जन - जागरण - गाँवों में खुले में मल - मूत्र - त्याग के निवारण हेतु जन - जागरण जरूरी है। 'स्वच्छ ग्रामीण मिशन' एवं ग्राम - पंचायतों के माध्यम से प्रयास किये जा रहे हैं। ग्रामीण स्त्रियों को स्वच्छता का महत्त्व बताकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कारण अब नव - युवतियाँ उसी घर से विवाह का रिश्ता स्वीकार करती हैं जहाँ शौचालय बने हैं। इस कार्य में सभी प्रदेश सरकारें, समाज के प्रतिष्ठित लोग सहयोग - सहायता दे रहे हैं। प्रधानमन्त्रीजी की सक्रियता से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति उत्साह दिखाई दे रहा है।
4. हमारा योगदान - देश के नागरिक होने के नाते हम सभी का कर्तव्य है कि हम स्वयं खुले में मल - मूत्र का त्याग न करें। हम गाँवों में जाकर लोगों को समझावें और उन्हें सरकारी आर्थिक सहायता दिलाकर शौचालय - निर्माण के लिए प्रेरित करें। इसके साथ ही श्रमदान द्वारा गाँवों की नालियों एवं पेयजल के स्थानों की सफाई करें। लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागृत करें तथा खुला - शौचमुक्त होने के लाभ बतावें। स्वास्थ्य - रक्षा की दृष्टि से इसका महत्त्व समझावें।
5. महत्त्व/उपसंहार - आम जनता के स्वास्थ्य, रहन - सहन, स्वच्छता आदि की दृष्टि से ग्रामीण क्षेत्रों में खुला चमक्त होने का सर्वाधिक महत्त्व है। इससे पर्यावरण प्रदषण भी कम होगा और गाँधीजी का 'क्लीन इण्डिया' का सपना साकार होगा। इस अभियान से जनता सब तरह से लाभान्वित रहेगी तथा देश से गन्दगी का कलंक मिट जायेगा।
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