Question
"कण्टके नैव कण्टकम्" कथायाः सारं हिन्दीभाषायां लिखत।

Answer

कथा-सार-कथा के अनुसार चञ्चल नामक कोई शिकारी था। एक बार वन में उसके द्वारा बिछाये गए जाल में एक बाघ फँस गया। बाघ के द्वारा प्रार्थना करने पर शिकारी उसे बाहर निकालता है। बाघ ने शिकारी से पानी लाने को कहा। पानी पीने के बाद बाघ ने कहा कि "मेरी प्यास तो शान्त हो गई, किन्तु मैं भूखा हूँ अतः मैं तुमको खाऊँगा।" बाघ की कृतघ्नता को देखकर शिकारी नदी के जल के पास जाता है।
नदी का जल कहता है कि लोग स्वार्थी ही होते हैं, वे मेरा जल पीते हैं और मुझे ही गन्दा करते हैं। इसी बात का समर्थन करता हुआ वृक्ष कहता है कि लोग मेरी छाया में विश्राम करते हैं और मेरे फल खाते हैं किन्तु मुझे ही काटते हैं। इसके बाद शिकारी अपनी व्यथा को वहीं पर स्थित एक लोमड़ी को सुनाता है। लोमड़ी अपनी चतुराई से उस बाघ को पुनः उसी जाल में फंसा देती है। वस्तुतः धूर्त (कपटी) लोगों के साथ कपटपूर्ण ही व्यवहार करना चाहिए।

Need a full question paper?

Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.

Start Generating Free