Question
मानव हृदय महासागर के समान है।
मानव हृदय भी किसी महासागर से कम नहीं है। उसकी गहराई का भी पता लगाना मुश्किल है। उसमें भी भावनाओं की तरंगें उठती रहती हैं। मानव हृदय रूपी शांत महासागर में प्रेम, करुणा, बंधुत्व, सहकार, न्याय, नीति के बहुमूल्य रत्न होते हैं। परंतु जब इस हृदय में उग्र भावनाएँ तूफान का रूप ले लेती हैं, तब वे घातक बन जाती हैं। निराशा के तूफान में आशा के जहाज डूब जाते हैं। हिंसा के झंझावात में अन्याय, अत्याचार आदि नृशंस कांड होते हैं। क्रूरता की तूफानी लहरों में मानवता लापता १ हो जाती है। इस प्रकार मानव हृदय सचमुच महासागर के समान है।
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