Question
मानव हृदय महासागर के समान है।

Answer

महासागर में अथाह जल होता है। उसकी अगम्य गहराई पता नहीं क्या-क्या अपने भीतर छिपाए रहती है। उसमें अनेक रत्न होने से उसे रत्नाकर भी कहते हैं। शांत महासागर की लहरें बड़ी सुन्दर लगती हैं। उसमें जलयान सुखद यात्रा करते हैं। परंतु तूफान आने पर महासागर भयंकर रूप ले लेता है। अनेक जलयान उसमें डूब जाते हैं।

मानव हृदय भी किसी महासागर से कम नहीं है। उसकी गहराई का भी पता लगाना मुश्किल है। उसमें भी भावनाओं की तरंगें उठती रहती हैं। मानव हृदय रूपी शांत महासागर में प्रेम, करुणा, बंधुत्व, सहकार, न्याय, नीति के बहुमूल्य रत्न होते हैं। परंतु जब इस हृदय में उग्र भावनाएँ तूफान का रूप ले लेती हैं, तब वे घातक बन जाती हैं। निराशा के तूफान में आशा के जहाज डूब जाते हैं। हिंसा के झंझावात में अन्याय, अत्याचार आदि नृशंस कांड होते हैं। क्रूरता की तूफानी लहरों में मानवता लापता १ हो जाती है। इस प्रकार मानव हृदय सचमुच महासागर के समान है।

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