Question
मृदा जल को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।

Answer

मृदा जल को प्रभावित करने वाले कारक - मृदा कणों के बीच रन्ध्रावकाशों में उपस्थित जल मृदा जल कहलाता है। विभिन्न मृदाओं में मृदा जल की स्थिति भिन्न-भिन्न होती है। अनेक कारक इसे प्रभावित करते हैं। प्रमुख कारकों का वर्णन निम्न प्रकार है-
(1) मृदा गठन (कणाकार) - मृदा कणाकार का मृदा जल पर बहुत प्रभाव पड़ता है। बड़े कणों में बड़े आकार की रन्ध्र नलिकाएँ होने से मृदा जल का प्रभाव तीव्र होता है। छोटे कण वाली मृदा में आर्द्रताग्राही जल का अधिशोषण अधिक होता है और इनमें केशीय जल की द्रुतगति होती है।
(2) आर्द्रता - आर्द्रता भी मृदा जल को प्रभावित करती है। वायुमण्डल में अधिक आर्द्रता होने पर मृदाओं में आर्द्रताग्राही जल की मात्रा बढ़ जाती है । मानसून के दिनों में शुष्क दिनों की अपेक्षा मृदा में आर्द्रताग्राही जल की प्रतिशत मात्रा अधिक होती है। वर्षा जब धीमी गति से होती है तो यह जल केशीय जल के रूप में पौधों के काम आता है। अधिक वर्षा होने पर जल समस्त रन्ध्रावकाशों को संतृप्त करके गुरुत्वाकर्षण के कारण भूमि की नीचे की तहों में चला जाता है और यह तल पौधों के लिए अनुपयोगी रहता है।
(3) मृदा संरचना - मृदा के कण पास-पास व्यवस्थित होने पर जल की अन्तःस्रवण गति कम होती है। गुरुत्व जल का अन्तःस्रवण प्लेटी एवं सपुंजित मृदाओं में कम होता है। मृत्तिका मृदाओं में प्रायः जलाक्रांत स्थिति बनी रहती है। अच्छी दानेदार मृदाओं में केशीय जल की पर्याप्त मात्रा पौधों को उपलब्ध रहती है।
(4) तापमान - तापमान भी मृदा जल को प्रभावित करता है। तापमान में कमी होने पर केशीय जल की मात्रा में वृद्धि होती है और तापमान में वृद्धि होने पर केशीय जल की मात्रा में कमी आ जाती है।
(5) जीवांश पदार्थ - मृदा में कार्बनिक अथवा जीवांश पदार्थ की उपस्थिति से केशीय क्षमता में वृद्धि होती है। अतः अधिक जीवांश पदार्थ वाली मृदा की जलधारण क्षमता अधिक होती है।

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