मृदा के विभिन्न अवयव निम्नलिखित हैं-
(1) खनिज पदार्थ - (i) मृदा में खनिज पदार्थों का आकार एवं संगठन उनके पैतृक पदार्थों के अनुसार होता है। (ii) ये खनिज पदार्थ चट्टानों के अपक्षय से प्राप्त होते हैं। ठोस भाग के 90 प्रतिशत से अधिक भाग में खनिज पदार्थ होते हैं जो कि विभिन्न आकार के कणों में पाये जाते हैं। (iii) कंकड़, पत्थर, बालू, सिल्ट एवं मृतिका में इनका अंश पाया जाता है। मृदा की बालू एवं सिल्ट अंश में अधिक मात्रा में खनिज कवार्टज एवं फेल्सपार हैं। (iv) मृदा में मृतिका अंश में द्वितीयक खनिजों की प्रधानता होती है। मृदा के खनिज पदार्थों में लगभग 90 प्रतिशत सिलिका, एल्युमिनियम, आयरन एवं ऑक्सीजन होती है।
(2) कार्बनिक पदार्थ - (i) मृदा में कार्बनिक पदार्थ, पौधों एवं पशुओं के अवशेषों के सड़ने-गलने से 3-5 प्रतिशत भारात्मक भाग के रूप में रहते हैं। (ii) मृदा में सूक्ष्मजीवों के निरन्तर विच्छेदन से मृदा की उत्पादकता बनी रहती है। कार्बनिक पदार्थ, मृदा में पोषक तत्वों को प्रदान करता है। (iii) मृदा वातन में वृद्धि, जल धारण क्षमता में वृद्धि एवं मृदा संरचना में सुधार आदि इसके कारण होता है। मृदा कार्बनिक पदार्थ प्रायः आंशिक विच्छेदित के रूप में या सड़े-गले पदार्थ (हयूमस) के रूप में पाये जाते हैं।
(3) मृदा जल - (i) मृदा जल का हिस्सा आयतानुसार 25 प्रतिशत होता है। (ii) मृदा जल रंध्रावकाशों में परिवर्तनीय बलों की मात्रा से धारिता होता है। (iii) पौधों के पोषण में मृदा जल की मुख्य भूमिका होती है। यह लवणों एवं पोषक तत्वों के साथ विलयन बनाकर पौधों को पोषित करता है। (iv) मृदा जल, मृदा संरचना, मृदा गठन, कार्बनिक एवं अकार्बनिक मृदा कोलॉयड्स की प्रकृति, रंध्रावकाशों की मात्रा आदि पर निर्भर रहता है।
(4) मृदा वायु - (i) रंध्रावकाश में मृदा वायु का आयतन 25 प्रतिशत होता है तथा यह रंध्रावकाशों में उपस्थित रहती है। (ii) मृदा में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा (0.3 प्रतिशत), वायुमण्डलीय कार्बन डाइऑक्साइड (0.03 प्रतिशत) से अधिक होती है। (iii) यह जलवाष्प से संतृप्त रहती है। (iv) इसमें ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन की मात्रा वायुमण्डल से कम होती है। मृदा वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा गहराई के साथ बढ़ती है एवं ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है।