सभी प्राणी अपनी जन्मभूमि को जान से भी प्यारा मानते हे तथा उसी को सबसे सुन्दर मानते है | मनुष्य के मनमे देश प्रेम हो तो उसे स्वदेश की हर वस्तु में सौन्दर्य नजर आता है | हम भारत वासियों के लिए भी हमर भारत सबसे प्रिय है |
भारत की सुन्दरता का वर्णन केवल हम ही नहीं करते | प्रसिद्ध विद्वान् मैक्समुलरने महारानी विक्टोरिया को लिखित पत्रमे कहा था |
“यदि हम ऐसे देश की खोज करने के लिए सम्पूर्ण विश्व की खोज करे जिसे प्रकृति ने सर्वसम्पन्न ,शक्तिशाली और सुन्दर बनाया है, तो मै भारतवर्ष की ओर संकेत करूँगा | प्रकृति ने भारत की देह का निर्माण एक सुंदरा देवी के रूप ने किया है | हिमालय के बर्फ से ढकी पहाड़िया उसका सुन्दर मुकुट है | अटक से कटक तक फैली उसकी विस्तृत बाहे है | कन्याकुमारी उस देवी के चरण है जो तिन और से घिरे समुद्र में विहार करने का निरंतर आनन्द ले रहे है | गंगा यमुना की धाराए उस देवी की छाती से निकलने वाला अमृत है जिसका पान करके देश के पचान्वे करोड़ पुत्र धन्य होते है |
भारतवर्ष विविधताओ का जादू भरा पिटारा है | इसमें पहाड़िया भी है ,समुद्र भी है ,जल – पूरित प्रदेश भी है तो सूखे रेगिस्तान भी ,हरियाली भी है उजाड़ भी है ,तपती लू भी है | तो शीतल हवाए भी ,बीहड़ वन भी है तो विस्तृत मैदान भी , यहाँ वसंत भी है तो पतझड़ भी ,गर्मी भी है तो सर्दी भी ,गोरे कश्मीरी भी है तो कालेदिलवाले भी ,चौड़े मुखवाले पहाड़ी भी है तो तीखी नाक वाले भी, चीन जापान की याद दिलाने वाली नन्ही –सिकुंडी आंखे भी है तो कमल सी खिली आँखों वाले भी, यहाँ गिरजे भी है तो गुरुद्वारे भी. मंदिर भी है तो मस्जिदे भी, यहाँ नग्न बदन पर खुली धोती पहनने वाले भी है तो पेंटसूट पहनने वाले भी, यहाँ हिन्दी भाषी भी है आंगलभाषी भी उर्दूभाषी भी है तो बंगला , उड़िया तमिल, कन्नड़ तथा अनेक भाषी भि है | यहाँ खानपान ,रहन सहन ,धर्म साधना ,विचार चिंतन किसकी विविधता नहीं है ? यही विविधता हमारी शान है ,हमारी समृधि का कारण है |
भारतवर्ष को ज्ञान के कारण “जगतगुरु” तथा धन वैभव के कारण “सोने की चिड़िया “ कहा जाता था | भारत में जितने खनिज भंडार है ,उतने एनी किसी देश में नहीं | हमारी इसी सम्पति को लुटने के लिए लुटेरे बार बार भारत पर आक्रमण करते रहे | आज भी भारत की कोख रत्नों से खाली नहीं हुई है |
ज्ञान के क्षेत्र में सारा विश्व भारत का ऋणी है | शून्य और गणना पध्हती भारतवर्ष की देन है | इसी प्रकार पर विज्ञानं की सारी सभ्यता टिकी हुई है | यहाँ के शिल्प, कला कौशल्य ,ज्योतिष –ज्ञान विश्व भर आलोक देते रहे है |
भारत के लिए भारत की सबसे अधिक गौरव की बात यह है कि इस धरती ने विश्व को सत्य अहिंसा धर्मा और सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया |आक्रमणकारियों को अपनी छाती पर बिठाकर उन्हें इस देश का अंग बना देता इसी धरती की महिमा है | भारत में जैन, बौद्ध हिंदु जेसे विशाल धर्मों ने जन्म लिया किंतु कभी दूसरे देश पर जबरदस्ती अधिकार करने का यत्न नहीं किया |भारत देश सिर उठाकर बड़े बड़े देशों को कह सकता है |
“तुमने जीते है देश तो क्या ,
“हमने तो दिलो को जीता है |”
हमने अपनी आजादी की लड़ाइ भी अहिंसा के अलौकिक अस्त्र से जीती विश्व की सभी समस्याओ पर विचार करने और उसका शांतपूर्ण हल ढूढने में भारत अग्रणी रहा है | विश्व को शांति चाहिए तो उसे भारत की शरण में आना होगा | हमें अपने भारत देश का गौरव है | भारत हमारा प्यारा महान देश है |
देश प्रेम सबसे बड़ी भावना है | जैसे अपनी मा गरीब, काली ,कुरूप होते हुए भी सबसे प्यारी लगती है वैसे अपना देश विश्व में सबसे बढ़कर प्यारा लगता है | देश को कही भी चोट लगती है तो सारा देश सिहर उठता है | देशवासियों के प्रबल देशप्रेम की वणहसे विदेशी बुरी नजर से भारत की और आँख उठाकर नहीं देख सकता | भारतदेश देशभक्तों , संतो, महापुरुषों जनक् है | चाणक्य , चन्द्रगुप्त ,शिवाजी, महाराणा प्रताप ,तिलक गोरवले भगतसिंह ,पु.गांधीजी ,सरदार पटेल आजाद , सुभाष ,जैसे महापुरुष ,रानी लक्ष्मीबाई ,सरोजिनी नायडू जैसे नारी रत्न हो गए | ऐसे भारत देश पर हमें गर्व है |