Question
महात्मा बुद्ध ने लोगों को क्या संदेश दिया?

Answer

महात्मा बुद्ध ने लोगों को दया, प्रेम, परोपकार का संदेश दिया। विश्व में व्याप्त अज्ञानता को उन्होंने ज्ञान रूपी दीये की लौ से आलोकित करना चाहा।

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इस कविता के आधार पर बताओ कि चिड़िया को किन-किन चीजों से प्यार है?
ऐसे कौन-कौन से बहाने होते हैं जिन्हें मास्टर जी एक ही बार में सुनकर समझ जाते है? ऐसे कुछ बहानों के बारे में लिखो।
‘लोक’ शब्द में कुछ जोड़कर जितने शब्द तुम्हें सूझें, उनकी सूची बनाओ। इन शब्दों को ध्यान से देखो और समझो कि उनमें अर्थ की दृष्टि से क्या समानता है। इन शब्दों से वाक्य भी बनाओ। जैसे- लोककला।
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“मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।”
कोई ज़बान, उर्दू, हिंदी या अंग्रेजी सीखने के लिए तुम्हें उसके अक्षर सीखने होते हैं। इसी तरह पहले तुम्हें प्रकृति के अक्षर पढ़ने पड़ेंगे, तभी तुम उसकी कहानी उसके पत्थरों और चट्टानों की किताब से पढ़ सकोगी। शायद अब भी तुम उसे थोड़ा-थोड़ा पढ़ना जानती हो। जब तुम कोई छोटा-सा गोल चमकीला रोड़ा देखती हो, तो क्या वह तुम्हें कुछ नहीं बतलाता? यह कैसे गोल, चिकना और चमकीला हो गया और उसके खुरदरे किनारे या कोने क्या हुए?
QUESTION:
Q.1. किसी भी भाषा को सीखने के लिए क्या सीखना पड़ता है?
(A) वाक्य (B) अक्षर (C) शब्द (D) व्याकरण
Q.2. प्रकृति के अक्षर हमें कहाँ से मिलते हैं?
(A) पुस्तकों से (B) पत्थरों और चट्टानों से (C) वृक्षों से (D) उपर्युक्त सभी
गीत में सीने और बाँह को फ़ौलादी क्यों कहा गया है?
खेल के बाद उम्मीदवारों की क्या हालत थी?
मगर हाल जानने का असली तरीका यह नहीं है कि हम केवल दूसरों की लिखी हुई किताबें पढ़ लें, बल्कि खुद संसार-रूपी पुस्तक को पढ़ें। मुझे आशा है कि पत्थरों और पहाड़ों को पढ़कर तुम थोड़े ही दिनों में उनका हाल जानना सीख जाओगी। सोचो, कितनी मज़े की बात है। एक छोटा-सा रोड़ा जिसे तुम सड़क पर या पहाड़ के नीचे पड़ा हुआ देखती हो, शायद संसार की पुस्तक का छोटा-सा पृष्ठ हो, शायद उससे तुम्हें कोई नई बात मालूम हो जाए। शर्त यही है कि तुम्हें उसे पढ़ना आता हो।
QUESTION:
Q.1. संसार को पुस्तक क्यों कहा गया है?
Q.2. संसार का हाल जानने का असली तरीका कौन-सा है?