वैदिक वाङ्मय के अन्तिम भाग में उपनिषदों का स्थान आता है, जिसमें जीवन-दर्शन के सिद्धान्तों का निरूपण किया गया है। आत्मा और प्रकृति के संयोग से इस जगत् की उत्पत्ति हुई है। परम ज्ञान की प्राप्ति ही इस जीवन का लक्ष्य है। सत्य के स्वरूप का चिंतन, आत्मा की विशेषता, सत्यमेव जयते, विद्वान् पुरुष का दिव्यलोकगमन तथा परम ज्ञान पाकर मृत्यु को वश में करना आदि इस पाठ के मुख्य वर्ण्यविषय हैं। उपनिषदों में आदर्श जीवनशैली का वर्णन किया गया है।