Question
मूत्रण की व्याख्या कीजिए।

Answer

मूत्रण (Micturition) - वृक्क द्वारा निर्मित मूत्र मूत्रवाहिनियों द्वारा मूत्राशय में जाता है और केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र द्वारा ऐच्छिक संकेत दिये जाने तक संग्रहित रहता है। मूत्राशय में मूत्र भर जाने पर उसके फैलने के फलस्वरूप यह संकेत उत्पन्न होता है। मूत्राशय भित्ति से इन आवेगों को केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र में भेजा जाता है। केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र से मूत्राशय की चिकनी पेशियों के संकुचन तथा मूत्राशय-अवरोधिनी (Urethral sphincter) के शिथिलन हेतु एक प्रेरक सन्देश जाता है जिससे मूत्र का उत्सर्जन होता है। मूत्र उत्सर्जन की क्रिया मूत्रण (Micturition) कहलाती है।

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