नियन्त्रण का अर्थ-नियन्त्रण से तात्पर्य संगठन में नियोजन के अनुसार क्रियाओं के निष्पादन करने से है। यह इस बात का भी आश्वासन है कि संगठन के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग प्रभावी तथा दक्षतापूर्ण ढंग से हो रहा है। अतः नियन्त्रण एक उद्देश्यात्मक कार्य है, वस्तुतः नियन्त्रण एक प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत संस्था के प्रबन्धक संस्था में सम्पन्न करवायी जाने वाली क्रियाओं के व्यावहारिक मापदण्ड तय करते हैं, वास्तविक निष्पादन का मूल्यांकन करते हैं, वास्तविक निष्पादन की पूर्व निर्धारित मापदण्डों से तुलना करके विचलनों का पता लगाते हैं तथा पाये गये विचलनों के कारणों का पता लगाकर उन्हें दूर करने के आवश्यक उपाय काम में लाते हैं ताकि विचलनों को यथासमय दूर किया जा सके तथा उनकी भविष्य में पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
कून्ट्ज एवं ओ'डोनेल के अनुसार, "प्रबन्धकीय नियन्त्रण के अन्तर्गत वास्तविक प्रगति तथा निर्धारित प्रमापों | से विचलनों का पता लगाया जाता है तथा उन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है, ताकि नियोजन के अनुसार लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।"