नियोजन का अर्थ-नियोजन का अर्थ पहले से यह निश्चय करना है कि भविष्य में क्या करना है तथा कैसे करना है। यह सृजनात्मकता तथा नवप्रवर्तन से अति निकट से जुड़ा हुआ है। नियोजन की आवश्यकता उस समय पड़ती है जब किसी एक क्रिया को पूरा करने के लिए अनेक विकल्प विद्यमान हों। यथार्थ में, नियोजन से तात्पर्य उद्देश्यों का निर्धारण तथा इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए समुचित कार्यविधि को विकसित करने से है। नियोजन सभी प्रबन्धकीय निर्णयों तथा कार्यवाहियों को दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। ये पूर्व निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए विवेकपूर्ण मार्ग भी सुलभ कराते हैं।
सार रूप में, नियोजन से आशय उद्देश्यों तथा लक्ष्यों का निर्धारण तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए एक कार्यविधि का निरूपण करने से है। यह क्या करना है तथा कैसे करना है, दोनों से सम्बन्धित है।