प्लासी के युद्ध के कारण-
1756 में सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब बना। कम्पनी को सिराजुद्दौला की ताकत से काफी भय था।
सिराजुद्दौला की जगह कम्पनी एक ऐसा कठपुतली नवाब चाहती थी जो उसे व्यापारिक रियायतें और अन्य सुविधाएँ आसानी से प्रदान कर दे।
कम्पनी ने सिराजुद्दौला के प्रतिद्वन्द्वियों में से किसी को नवाब बनाने का प्रयास किया किन्तु कम्पनी को कामयाबी नहीं मिली।
सिराजुद्दौला ने आदेश दिया कि कम्पनी उनके राज्य के राजनीतिक मामलों में टाँग अड़ाना बन्द कर दे, किलेबन्दी रोके और बाकायदा राजस्व चुकाए। उक्त कारणों से दोनों पक्षों के बीच प्लासी का युद्ध हुआ।
प्लासी का युद्ध-
जब दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तो अपने 30,000 सिपाहियों के साथ नवाब ने कासिम बाजार में स्थित इंग्लिश फैक्टरी पर हमला बोल दिया।
नवाब की फौजों ने कम्पनी के अफसरों को गिरफ्तार कर लिया, गोदाम पर ताला डाल दिया, अंग्रेजों के हथियार छीन लिए और अंग्रेज जहाजों को घेरे में ले लिया।
इसके बाद नवाब ने कम्पनी के कलकत्ता स्थित किले पर कब्जे के लिए उधर का रुख किया।
मद्रास में तैनात कम्पनी के अफसरों ने रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में सेनाओं को कलकत्ता रवाना कर दिया। इस सेना को सैनिक बेड़े की मदद भी मिल रही थी।
इसके बाद नवाब के साथ लम्बे समय तक सौदेबाजी चली।
अन्त में 1757 में रॉबर्ट क्लाइव ने प्लासी के मैदान में सिराजद्दौला को पराजित कर दिया।
जंग के बाद सिराजुद्दौला को मार दिया गया और मीर जाफर को बंगाल का नवाब बना दिया गया। भारत में कम्पनी की यह पहली बड़ी जीत थी।