(1) विक्रय-प्राथमिक बाजार में नई प्रतिभूतियों का विक्रय होता है, जबकि द्वितीयक बाजार में केवल निवर्तमान शेयरों का ही व्यापार होता है।
(2) पूँजी निर्माण-प्राथमिक बाजार में कोष बचतकर्ताओं से निवेशकों को जाता है, अर्थात् प्राथमिक बाजार प्रत्यक्ष रूप से पूँजी निर्माण को बढावा देता है, जबकि द्वितीयक बाजार शेयरों को रोकड़ में परिवर्तनीयता (तरलता) को बढ़ाती है। अर्थात् द्वितीय बाजार परोक्ष रूप से पूँजी निर्माण को बढ़ावा देता है।