Question
प्रतिकृतिकरण तथा अनुलेखन में अन्तर बताइए।
| प्रतिकृतिकरण | अनुलेखन |
| 1. डी. एन. ए. अणु का द्विगुणन ही प्रतिकृतिकरण कहलाता है। इस प्रक्रिया द्वारा एक द्विकुण्डली DNA अणु से दो द्विकुण्डली DNA अणु से दो द्विकुण्डली DNA अणुओं का निर्माण होता है। | इस प्रक्रिया में डी. एन. ए. के टेम्पलेट रज्जुक पर एम-आर. एन. ए. अणु का निर्माण होता है। |
| 2. इस प्रक्रिया का उत्प्रेरण डी. एन. ए. निर्भर डी. एन. ए. पॉलीमरेज एंजाइम द्वारा होता है। | इसका उत्प्रेरण डी. एन. ए. निर्भर आर. एन. ए. पॉलीमरेज एंजाइम द्वारा होता है। |
| 3. डी. एन. ए. के दोनों रज्जुक भाग लेते हैं। | अनुलेखन केवल एक (टेम्पलेट) रज्जुक द्वारा होता है। |
| 4. डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटाइड कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होते हैं। इन्हीं के फॉस्फेट ऊर्जा प्रदान करते हैं। | राइबोन्यूक्लियोटाइड्स कच्चे माल के रूप में काम आते हैं। इन्हीं के फॉस्फेट ऊर्जा प्रदान करते हैं |
| 5. पूरे जीनोम का प्रतिकृतिकरण एक साथ होता है। | एक बार में केवल कुछ जीनों का अनुलेखन होता है। |
| 6. प्रतिकृतिकरण के उत्पाद (DNA अणु) स्थायी होते हैं। | अनुलेखन के उत्पाद (m-RNA) अस्थायी होते हैं तथा अनुवाद के बाद अपघटित हो जाते हैं |
| 7. कोशिका चक्र की S अवस्था में सम्पन्न होता है। | अनुलेखन G1 व G2 अवस्था में तथा कुछ मामलों में हर समय चलता रहता है। |
| 8. प्रारम्भ होने के लिए प्राइमर आवश्यक होता है। | अनुलेखन में प्राइमर की आवश्यकता नहीं होती। |
| 9. उत्पाद को प्रसंस्करण की आवश्यकता नहीं होती। डी. एन. ए. पॉलीमरेज ही प्रूफ रीडिंग करता है। | यूकैरियोटिक कोशिका में प्रारम्भिक उत्पाद के प्रसंस्करण से ही अंतिम उत्पाद बनता है। |
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