प्रतिवर्ती क्रिया-किसी दृश्य, अदृश्य, बाह्य अथवा भीतरी उद्दीपन के प्रभाव में होने वाली वे अनैच्छिक क्रियाएँ जिनका संचालन एवं समन्वयन प्रायः मेरुरज्जु की तन्त्रिकाओं द्वारा होता है, प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहलाती है। उदाहरण-पैर में काँटा चुभने पर झटके के साथ पैर का हट जाना, छींक आना, तेज आवाज सुनकर चौंक जाना आदि।
प्रतिवर्ती चाप-प्रतिवर्ती क्रियाओं में ग्राही अंगों से सूचनाएँ संवेदी तन्त्रिकाओं द्वारा मेरूरज्जु तक जाती है। वहाँ से अभिक्रिया के लिए प्रेरक तन्त्रिका द्वारा कार्यकारी अंग तक पहुँचती है। इस पथ को प्रतिवर्ती चाप कहा जाता है।