भूमिका:
पर्यावरण जीवन का आधार है। यदि पर्यावरण स्वस्थ है तो जीवन भी सुरक्षित है। लेकिन आधुनिक युग की विकास की दौड़ में मनुष्य ने प्रकृति का दोहन कर उसे प्रदूषित कर दिया है। आज प्रदूषण एक वैश्विक समस्या बन चुका है।
मुख्य भाग:
प्रदूषण के मुख्य प्रकार हैं — वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और मृदा प्रदूषण। यह प्रदूषण कारखानों के धुएँ, वाहनों की गैस, पॉलीथीन, केमिकल अपशिष्ट, वृक्षों की कटाई और जनसंख्या वृद्धि से हो रहा है।
इसका परिणाम है — ग्लोबल वार्मिंग, ओज़ोन परत में छेद, बर्फ का पिघलना, असमय वर्षा, बीमारियाँ आदि। आज छोटे-छोटे बच्चे भी दमा, एलर्जी, और फेफड़ों की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं।
सरकार और समाज को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के उपाय अपनाने होंगे — जैसे पुनः प्रयोग, वृक्षारोपण, ग्रीन एनर्जी, रीसायक्लिंग, और प्लास्टिक का बहिष्कार।
निष्कर्ष:
पर्यावरण की रक्षा हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। यदि हमने अब भी ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल शुद्ध वायु और जल के लिए तरस जाएँगी।