पर्यावरण से आशय-किसी भी जीवित प्राणी के चारों ओर पाये जाने वाले लोग, स्थान, वस्तुएँ एवं प्रकृति को पर्यावरण कहते हैं। यह प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित परिघटनाओं का मिश्रण है। पर्यावरण के प्रकार-पर्यावरण के दो प्रकार बताए जा सकते हैं-(1) प्राकृतिक पर्यावरण और (2) मानवीय पर्यावरण। यथा-
(1) प्राकृतिक पर्यावरण-भूमि, जल, वायु, पेड़-पौधे एवं जीव-जन्तु मिलकर प्राकृतिक पर्यावरण बनाते हैं। इसमें पृथ्वी पर पाई जाने वाली जीवीय तथा अजीवीय दोनों परिस्थितियाँ सम्मिलित हैं। प्राकृतिक पर्यावरण को निम्नलिखित चार प्रमुख परिमण्डलों में विभाजित किया जाता है-
- स्थलमण्डल-पृथ्वी की कठोर ऊपरी परत को स्थलमण्डल कहते हैं। यह चट्टानों, खनिजों से बना होता है एवं मिट्टी की पतली परत से ढंका होता है। यह पहाड़, पठार, मैदान, घाटी आदि जैसी विभिन्न स्थलाकृतियों वाला विषम धरातल होता है।
- जलमण्डल-जल के क्षेत्र को जलमण्डल कहते हैं। यह जल के विभिन्न स्रोतों; जैसे-नदी, झील, समुद्र, महासागर आदि विभिन्न जलाशयों से मिलकर बनता है।
- वायुमण्डल-पृथ्वी के चारों ओर फैली वायु की पतली परत को वायुमण्डल कहते हैं। इसमें कई प्रकार की गैसें, धूलकण एवं जलवाष्प उपस्थित रहते हैं।
- जैवमण्डल-पादप एवं जीव-जन्तु मिलकर जैवमण्डल का निर्माण करते हैं। यह पृथ्वी का वह संकीर्ण क्षेत्र है जहाँ स्थल, जल एवं वायु मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं।
(2) मानवीय पर्यावरण-मानवीय पर्यावरण वह है जिसमें मानव व मानव की परस्पर क्रियाएँ, उनकी गतिविधियाँ एवं उनके द्वारा बनाई गई रचनाएँ आती हैं; जैसे-व्यक्ति, परिवार, समुदाय, धर्म, शिक्षा, आर्थिक क्रियाकलाप, राजनैतिक क्रियाकलाप आदि।